Thursday, 29 May 2014

कहानी प्रतीक की


एक बेरोजगार आदमी, जिसका नाम प्रतीक था. एक बड़ी company में peon की post के लिए interview देने गया.. उससे कुछ सवाल पूछे गए. और फिर एक practical test लिया गया की, “जाकर चाय लेकर आओ.”

वो test में भी पास हो गया. उसे उसका email देने के लिए कहा गया. पर उसने जवाब दिया “मेरे पास computer नहीं है. और न ही email है.” “माफ़ करो.”  
उस employer ने कहा “अगर तुम्हारे पास email नहीं है. इसका मतलब है तुम्हारा कोई अस्तित्व ही नहीं है. इतनी बड़ी कम्पनी में email के बिना तुम काम नहीं कर सकते. तुम्हे नौकरी नहीं दी जा सकती.”
प्रतीक बहुत निराश हो गया. उसके जेब में केवल 500 रुपये बचे थे.

वो हार नहीं मान सकता था. इसलिए वो दूसरे दिन सुबह सुबह मंडी गया. और वहां से 500 रुपये के टमाटर ख़रीद लाया. पूरा दिन उसने घर घर जाकर टमाटर बेचे. और 300 रुपये का मुनाफ़ा हुआ.
वो हर दिन यही करने लगा. जल्द ही उसने दुसरे काम भी शुरू कर दिए, उसका बहुत मुनाफ़ा होने लगा . एक दूकान ख़रीदी. एक truck ख़रीद लिया. और केवल 5 सालो में प्रतीक की compnay देश की सबसे बड़ी food retailer companies में से एक बन गयी. उसने अपने परिवार का भविष्य सुरक्षित करने के बारे में सोचा. और एक life insurance भी करवा लिया.

फिर एक दिन एक पत्रकार उसका interview लेने आया. उसने उससे कई सवाल पूछे. और घंटो बातें की.
और आखिर में पत्रकार ने उससे उसका email माँगा.

प्रतीक ने जवाब दिया, “मेरे पास email नहीं है.”

पत्रकार बड़ा हैरान हुआ. उसने प्रतीक से कहा, “क्या आप जानते है की email कितनी ज़रूरी चीज़ है. आप आज इतने सफल है. आप सोच सकते है यदि आपके पास email होता तो आप क्या कर रहे होते, कितने अधिक सफल होते?”

प्रतीक ने कुछ देर सोचा फिर जवाब दिया, “अगर मेरे पास email होता तो मैं एक company में peon की नौकरी कर रहा होता.”

शिक्षा - इतना तो हम सभी जानते और मानते की हर किसी के पास सारे साधन resources नहीं हो सकते. पर हमारे पास जितना है उससे हम कितना कुछ कर पाते है सफ़लता के असल मायने इसी में है
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आपको ये कहानी कैसी लगी. हमे comments में जरुर बताये.

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